सरकारी याेजना में 20 करोड़ की साइबर ठगी करने वाले 9 आराेपियाें की जमानत हाईकोर्ट से भी खारिज

झालावाड़. पुलिस ने ऑपरेशन शटर डाउन चलाकर किसान सम्मान निधि सहित अन्य सरकारी योजनाओं में करोड़ों रुपए की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के 51 सदस्यों को गिरफ्तार कर करोड़ों रुपए की साइबर ठगी का खुलासा किया था। इनमें से 9 आरोपियों की जमानत याचिका दूसरी बार हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। अब इन आरोपियों का ठिकाना झालावाड़ जेल ही रहेगा।
एसपी अमित कुमार ने बताया कि जलंधर पंजाब निवासी सुनत शर्मा, कपूरथाना पंजाब निवासी संदीप शर्मा, अकतासा असनावर निवासी बंटी मीणा, सदर थाना दौसा निवासी रोहिताश सैनी, चेतराम सैनी, कामखेड़ा थाना झालावाड़ निवासी सुनील कुमार साहू, अकलेरा निवासी धनराज, परमानंद व जलधर पंजाब निवासी रोहित कुमार ने दूसरी बार हाईकोर्ट में अपने वकील के मार्फत जमानत याचिका लगाई थी। जिस पर हाईकोर्ट ने 9 ही आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। पूर्व में झालावाड़ डीजे कोर्ट से भी इनकी जमान खारिज हो चुकी है।

20 करोड़ से ज्यादा की साइबर ठगी की थी

पुलिस जांच में सामने आया कि 9 ही आरोपियों ने मास्टर माइंड रामवतार सैनी के एजेंट व सहयोगी बनकर किसान सम्मान नि​िध, दिव्यांग पेंशन योजना, सहित विभिन्न सरकारी जन कल्याणकारी योजनाओं में सेंध लगाकर करीब 20 करोड़ रुपए से ज्यादा की साइबर ठगी की थी। इनके और इनके परिजनों के खाते में भारी मात्रा में राशि मिली थी।

किस आरोपी पर क्या था आरोप

जांच में सामने आए साक्ष्य के अनुसार इस पूरे घपले का मास्टर माइंड रामवतार सैनी है। सुनंत शर्मा वेबसाइट डवलपर है। उसने संदीप शर्मा को रामवतार सैनी से मिलवाकर साइबर ठगी की राशि अपने खाते में ट्रांसफर करवाने व वेबसाइट डवलप कराने का का अारोप है। बंटी मीणा, सुनील साहू व धनराज ने एजेंट के रूप में डाटा व अन्य सामग्री जुटाकर खाते खुलवाकर सरकारी वेबसाइट से छेडछाड़ की। रोहिताश व चेतराज मास्टर माइंड रामवतार सैनी के यहां कंप्यूटर ऑपरेटर रहते हुए इस अपराध में शामिल रहे। इसके अलावा रोहित भी संदीप शर्मा का कर्मचारी था। उसने इस अपराध में सक्रिय भूमिका निभाई।

कोर्ट की टिप्पणी… जमानत दी तो बकाया अनुसंधान प्रभावित होगा

कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपियों पर जो आरोप है वे किसी आवेश जनित घटना से संबधित नहीं होकर एक सुनियोजित षडयंत्र हैं। जो कल्याणकारी योजनाओं में सेंधमारी करते हुए करोड़ों रुपए के घपले का आरोप है। इस कारण इन्होंने अनुचित लाभ प्राप्त किया व और वास्तविक लाभार्थी उससे वंचित रहे। अभी बकाया आरोपियों के विरूद्ध अनुसंधान लंबित है। अपराध में लिप्त राशि और अधिक बढ़ने की संभावना हो सकती है। ये गंभीर अपराध है, यदि जमानत दी गई तो बकाया अनुसंधान प्रभावित होगा।

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